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If you want to see this problem in action, just copy the following junked Unicode text and paste it into the left box on the homepage of this service. Click the 'Convert' button there, and see how the unreadable text becomes readable. अगर आप इस समस्या को व्यावहारिक रूप से समझना और इस सेवा को आजमाना चाहते हैं तो नीचे दिए गए नमूने के विकृत यूनिकोड पाठ को कॉपी करके होम पेज पर दिए गए बक्से में पेस्ट कर दें। वहां दिए कनवर्ट बटन को दबाकर आप इस पाठ को पढ़ सकेंगे। Here is your trial text: बापू भारत को सदैव फलता-फूलता देखना चाहते थे लेकिन किसी का शोषण किए बिना। उनके तीन सिद्धांत अहिंसा, सत्याग्रह एवं सर्वोदय भारत में शांति, समानता और समृद्धि के मंत्र हैं जिनको अंगीकार करके भारत आदर्श समाज का निर्माण कर सकता है। लेकिन आजादी के सा वर्ष बाद भी हम अंधकार में क्यों भटक रहे हैं। देश भर में कहीं नक्सलवाद पनप रहा है तो कहीं आतंकवाद। कहीं पर साम्प्रदायिकता फन फैलाए खड़ी है तो कहीं अलगाववाद। आखिर गांधी के देश में रहते हुए भी हम गांधीवाद से कैसे दूर होते गए, इसका जवाब कोई ज्यादा क िन नहीं है। गांधीवाद का मूलतत्व है त्याग एवं सेवाभाव, जब तक हमारे अंदर त्याग एवं सेवाभाव पैदा नहीं होंगे तब तक गांधीवाद और गांधी दर्शन को किसी एक सिरे को पकड़ना मुश्किल है। जरा बिहार और उड़ीसा के देहातों का भ्रमण कीजिए- न खाने को रोटी का टुकड़ा है, न तन ढँकने को कपड़ा। फूस की झोपड़ी भी दुर्लभ। यही वह जगह है जहां जिन्दगी मौत को तरसती है। |
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