आपने जो कहा... (44
प्रतिक्रियाएं)
* लेख में ब्लागिंग के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुये हिंदी
ब्लागिंग से जुड़े हुये तमाम मुद्दों, जिनमें विवादित मुद्दे भी शामिल हैं, की भी निष्पक्ष
जानकारी देने की ईमानदार कोशिश की गयी है। यह भी बहुत महत्वपूर्ण है कि ब्लाग से संबंधित
जानकारी के लिये सात पेज
कादम्बिनी पत्रिका ने दिये हैं। ब्लागिंग से जुड़े
तमाम लोगों से बातचीत करके बहुत मेहनत से लिखे गये इस लेख के अंश देना आपको उस सुख
से वंचित करना होगा जो आपको खुद इस लेख को पूरा पढ़ने के दौरान मिलेगा।
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अनूप शुक्ला (http://hindini.com/fursatiya/?p=346) की
फुरसतिया
में लिखी टिप्पणी
1 अक्तूबर 2007
* प्रिय बालेंदु भाई, कादम्बिनी का अंक कल ही पढ़ा, व संपूर्ण आलेख आज पढ़ा। मुझे लगता
है कि कादम्बिनी में इस शानदार लेख को नाहक संपादित किया गया। लेख परिपूर्ण है,
और आपकी मेहनत उसमें झलकती
है. यह एक ऐतिहासिक दस्तावेज बन गया है। मैंने इसका लिंक
रचनाकार व अपने चिट्ठे पर दिया है।
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रवि रतलामी (http://raviratlami.blogspot.com)
* मैंने आज यह लेख दुबारा पढ़ा। बहुत मेहनत और ईमानदारी से लिखे इस लेख के लिये बहुत-बहुत
बधाई। आपने जिस खूबी से ब्लाग और सारे हिंदी ब्लाग जगत की सारगर्भित जानकारी दी उससे
मन खुश हो गया यह लेख पढ़कर। नारद, मोहल्ला और अन्य विवादों के बारे में जिस सफ़ाई से
आपने लिखा उससे आपके लेखन का मुरीद हो गया मैं। टिप्पणियां भी अच्छी लगीं। अब आपसे
एक अनुरोध यह है कि आप इस लेख में संबंधित सभी ब्लागर्स के लिंक डाल दें तो सोने में
सुहागा। कादम्बिनी में तो इसकी सुविधा न थी लेकिन नेट पर तो है। आपको एक बार फिर से
बधाई!
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अनूप शुक्ला (http://hindini.com/fursatiya)
2 अक्तूबर 2007
(अनूप भाई, बहुत अच्छा सुझाव है। सभी ब्लॉगर साथियों के लिंक जल्दी ही लगा दिए जाएंगे-
बालेन्दु)
* बहुत अच्छा काम किया है आपने। लेकिन अफसोस यही है कि आपके अपने योगदान का
उल्लेख रह गया। बहुत बहुत साधुवाद।
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अविनाश (http://mohalla.blogspot.com)
* आपका ब्लॉग वाला लेख शुरू से आख़िर तक पढा और बहुत नई जानकारी मिली। अपने लेखों से
भविष्य में भी कभी वंचित न करें।
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प्रो. सुरेन्द्र गंभीर (पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय)
* एक अच्छा लेख। बालेन्दु चिट्ठाकारी और पत्रकारिता से काफी समय से जुड़े हुए हैं। उनसे
इसी तरह के उत्कृष्ट लेख की आशा थी। बालेन्दु को एक अच्छे लेख के लिए धन्यवाद।
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जीतेन्द्र चौधरी (http://www.jitu.info)
* इंटरनेट की दुनिया को समझने, हिन्दी को इंटरनेट पर स्थापित करने, अपनी बात
को अपनी भाषा में कहने और अपने आसपास हो रही घटनाओं को दुनिया और समाज के सामने लाने
की कोशिश में लगे हर व्यक्ति को श्री बालेंदु दाधीच का यह लेख जरूर पढ़ना चाहिए। बालेन्दु
जी, हमने मीडिया के सभी साथियों को आपके लेख के बारे में लिंक भेजा है। लेख का लिंक
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http://www.hindimedia.in/content/view/452/28/
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शिवानी जोशी/ चंद्रकांत जोशी (हिंदी मीडिया चैनल, मुंबई)
* ब्लॉग की दुनिया पर आपका लिखा लेख पढा ! इस विस्तृत और शोधपरक लेख में आपने ब्लॉग
जगत के लगभग हर पहलू को समेट लिया है ! मेरे शोध की दृष्टि से भी यह लेख बहुत महत्वपूर्ण
है ! इतना गंभीर लेख पढवाने के लिए आपका तहेदिल से शुक्रिया !
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नीलिमा (
http://linkitmann.blogspot.com)
* मैंने हिंदी ब्लॉगिंग पर इससे अच्छा और विस्तृत लेख नहीं पढ़ा। आपने गजब की मेहनत
की है। मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूं। ब्लॉगिंग निस्संदेह एक सशक्त माध्यम है।
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पंकज बेंगानी (http://www.tarkash.com)
* आपका हिन्दी ब्लॉगिंग पर लिखा लेख पढ़ा. ऐसा विस्तृत व निष्पक्ष लेख पहली बार लिखा
गया है। शुभकामनाएं व साधूवाद।
- संजय बेंगानी (http://www.tarkash.com)
* मैं आपके आलेख को बिलकुल घटिया मानता हूँ। पता नहीं आपने कैसे यह आलेख तैयार किया
है। मुझे लगता है कि केवल आपने अपने सम्पर्क में होने वाले ब्लॉगरों से चर्चा की है।
जबकि हिन्द-युग्म ब्लॉग अभी का सक्रियतम ब्लॉग है और आपने उसकी चर्चा भी नहीं
की है। आप जैसे पत्रकारों के कारण सच हमेशा परदे में रह जाता है। लानत है आप पर।
- शैलेश भारतवासी
(शीशा दिखाने के लिए धन्यवाद शैलेश भाई। ब्लॉगिंग
में हिंद-युग्म का यकीनन अहम योगदान है- बालेन्दु)
* मैं शैलेशजी की बात का विरोध करता हूं। हिंद-युग्म निस्संदेह एक अच्छा प्रयास
है जिसका उल्लेख होना चाहिए था। लेकिन शैलेशजी की भाषा एकदम गलत है। उनका यह कहना कि
आपने सिर्फ उन लोगों के बारे में लिखा जो आपके संपर्क में हैं, कितना गलत है। मैं तो
आपको जानता ही नहीं था, कभी मेल तक नहीं किया था। :-(
- पंकज बेंगानी
* इस लेख को लघु रिसर्च रिपोर्ट कहा जा सकता है। पूरा लेख पढ़े बगैर नहीं रह सकते।
वाकई आपने खूब मेहनत की है इसे लिखने में। अभी तक ब्लॉग और ब्लॉगिंग पर प्रकाशित
कई लेख पढ़े लेकिन इससे बेहतर और मजेदार नहीं थे। भाई शैलेश जी ने जो नाराजगी व्यक्त
की है उससे मैं सहमत नहीं हूं क्योंकि आप और मैं एक दूसरे को कतई नहीं जानते और आपने
वाह मनी ब्लॉग का जिक्र किया है। उम्मीद है भाई शैलेश जी की नाराजगी आपकी संक्षिप्त
टिप्पणी से जरुर दूर हुई होगी। ऐसी रिपोर्ट लिखते समय कुछ नाम छूट सकते हैं लेकिन
इसका मतलब यह नहीं होता कि कार्य करने वालों का योगदान कम हो जाता है।
- कमल शर्मा (http://wahmoney.blogspot.com)
* बालेन्दु जी, आप अपनी वेबसाइटों के जरिए जितना कार्य कर रहे हैं उसे देखकर
मैं आश्चर्यचकित रह जाता हूं। वैसे यह इस बात का रिमाइंडर भी है कि आपका यूनिकोड
हिंदी संपादक सॉफ्टवेयर अब जल्दी ही आ जाना चाहिए।
- शास्त्री जेसी फिलिप (http://www.sarthi.info)
* आपका आलेख देखा और बहुत पसँद आया। आप द्वारा बनाये गये अन्य कई वेब भी देखे। ८ वे.
विश्व हिन्दी सम्मेलन का ऐतिहासिक वेब पोर्टल बना कर आपने महत्त्वपूर्ण और यशस्वी कार्य
किया है। उसके लिये आपको बहुत बहुत, बधाई !मेरा परिचय दे दूँ - मैं स्व.पंडित नरेन्द्र
शर्मा की बेटी हूं। हिन्दी चिठ्ठा जगत पर मेरा भी एक ठिकाना है।
- लावण्या शाह (http://lavanyam-antarman.blogspot.com)
* अभी-अभी कादम्बिनी में ब्लॉगिंग पर आपका लेख पढ़ा। इससे पहले भी कादम्बिनी
में ब्लॉग के बारे लेख छ्प चुका है। लेकिन जितना व्यापक और संपूर्ण आपका लेख उसके मुकाबले
अब तक के लेख कहीं नहीं ठहरते। आपकी मेहनत इस लेख में साफ झलकती है। क्या आप सारे चिट्ठे
पढ़ते हैं क्योंकि हिन्दी के जितने भी प्रमुख चिट्ठाकार हैं लगभग सभी का जिक्र आपके
लेख में है। इतने अच्छे लेख के लिये हार्दिक धन्यवाद स्वीकार करें। अभी नैट पर भी आपका
पूरा लेख पढ़ा। खुशी हुई। यदि हो सके तो जिन चिट्ठाकारों का नाम है उनका लिंक भी दे
दें जिससे जो भी इस लेख को पढ़े वो उन चिट्ठाकारों तक भी पहुंच सके। यह नैट पर हिन्दी
के प्रचार प्रसार में अहम भूमिका निभायेगा।
- काकेश कुमार (http://kakesh.com)
(धन्यवाद काकेश भाई, थोड़ा व्यस्त हूं। पर लिंक डालने का
काम जल्दी ही हो जाएगा- बालेन्दु)
* नेट पर ब्लागिंग से संबंधित आपका यह लेख बहुत महत्वपूर्ण और दस्तावेजी है। आप "सेतु
साहित्य" के लिए
www.setusahitya.blogspot.com पर क्लिक कर सकते हैं।
यह अनुवाद केंद्रित पत्रिका है।
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सुभाष नीरव
* दिल प्रसन्न हो गया इतना उपयोगी लेख पढ़कर। यदि ब्लोगिंग के सम्बन्ध में
ऐसी उपयोगी और गहन जानकारी देने के लिए आप जैसे लोग जुट जाएँ तो हिन्दी के भविष्य को
उज्जवल होने से कोई नहीं रोक सकता है। अंग्रेजी की हालत तो वैसे भी पतली होती नज़र आ
रही है। आपको जोरदार बधाई, अंग्रेजी के विरुद्ध और अभिव्यक्ति की अनुगूँज के लिए ब्लोगिंग
के उपयोग पर।
- अविनाश वाचस्पति (http://
avinashvachaspati.blogspot.com
)
* मैंने आपका पूरा आलेख पढ़ा। मैं कई बार प्रभासाक्षी देखता हूं। आज पता चला
कि उसका संपादन आप संभाल रहे हैं। आपकी पूरी रचना बड़ी ही तथ्यपरक लगी और पढ़कर प्रतीत
हुआ कि लेखन को बड़े ही गहन विश्लेषण के बाद अंजाम दिया गया है। बधाई स्वीकारें।
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मुरली मनोहर श्रीवास्तव (
http://murlimanoharsrivastava.blogspot.com)
* आपकी वेबसाइट देखकर बहुत अच्छा लगा। आपके सॉफ्टवेयर भी बहुत निराले हैं।
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रूपेश कुमार तिवारी (roopkt@gmail.com)
* आपने ब्लॉगिंग की दुनिया की एक मुकम्मिल तस्वीर इस आलेख में पेश कर दी है। बहुत बहुत
बधाई। मैं इस लेख को अपने कई मित्रों को भेज रहा हूं।
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दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (
http://www.indradhanushindia.org
)
* ब्लॉगिंग पर केंद्रित आपका संपूर्ण आलेख पढ़ा, वाकई आपने "संजय" सी दृष्टि डालते
हुए चौतरफ़ा नज़र डाली है!! निश्चित ही हिन्दी ब्लॉगिंग में इस लेख को एक मील का पत्थर
माना जाएगा। साधुवाद के साथ धन्यवाद भी स्वीकार करें।
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संजीत त्रिपाठी (
http://sanjeettripathi.blogspot.com/)
* आपका लेख पढ़ रहा था कादंबिनी वाला, ब्लॉग पर। बहुत विस्तृत और ढेर सारी रिसर्च के
बाद लिखा है, अच्छा लगा।
- राजेश प्रियदर्शी (बीबीसी हिंदी.कॉम)
* काफ़ी पहले हमने बालेंदु दाधीच के दो लेख ( युनिकोड पर)
दीवान पर डाले थे,
सहारा से उठाकर।
ये रहा चिट्ठाकारी पर उनका एक हालिया लेख, मज़े लें। हमारे सभी साथी
कादंबिनी
तो नहीं पढ़ते, गो यह तय है क